केंद्र सरकार समुद्री क्षेत्र से खनिज संपदा के दोहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। खान मंत्रालय ने Andaman Sea में स्थित अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया आरंभ करने का फैसला लिया है। इस पहल का मकसद देश की समुद्री सीमाओं के भीतर छिपे बहुमूल्य खनिज भंडार का व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों के अनुसार, यह नीलामी Offshore Areas Mineral (Development and Regulation) Act के प्रावधानों के तहत संचालित की जाएगी, जो समुद्री खनिज संसाधनों के दोहन को कानूनी ढांचे में लाने का काम करता है। इससे पहले भी सरकार ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में इसी तरह की खनिज खोज परियोजनाएं शुरू की थीं, लेकिन अंडमान सागर क्षेत्र में यह पहली बार होगा जब बड़े पैमाने पर ब्लॉकों की बोली लगाई जाएगी।
मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक सर्वेक्षणों में इस क्षेत्र में मूल्यवान धात्विक और गैर-धात्विक खनिजों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इन संसाधनों का व्यावसायिक दोहन न केवल घरेलू खनिज आपूर्ति को मजबूत करेगा, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम करेगा। इसके अलावा इस पहल से समुद्री क्षेत्र में तकनीकी अनुसंधान, निवेश और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नीलामी में हिस्सा लेने के इच्छुक निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए मंत्रालय जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड जारी करेगा। पर्यावरणीय स्वीकृतियों और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने की योजना बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री सीमाओं के भीतर मौजूद अन्य क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर खनिज ब्लॉकों की नीलामी की जा सकती है, जिससे देश की ब्लू इकोनॉमी को नई दिशा मिलेगी।
छवि: Carlos Muñoz-Royo (Wikimedia Commons)
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