उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा- हिंदुत्व किसी के विरुद्ध नहीं, यह सर्वसमावेशी विचारधारा
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने हाल ही में ‘विश्वसंचार हिंदुत्व का’ नामक पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में हिंदुत्व की अवधारणा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विचारधारा किसी वर्ग, समुदाय या धर्म के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह सभी को एकसाथ जोड़कर चलने की भावना पर आधारित है।
कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों, लेखकों और गणमान्य अतिथियों के समक्ष बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदुत्व का मूल स्वरूप विभाजनकारी नहीं बल्कि समावेशी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सभ्यता की जड़ें सदियों से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानने के सिद्धांत पर टिकी रही हैं, और हिंदुत्व इसी परंपरा का विस्तार है।
पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान राधाकृष्णन ने कहा कि आज के दौर में जब वैश्विक स्तर पर विभिन्न विचारधाराओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, ऐसे में इस तरह की पुस्तकें समाज को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। उन्होंने लेखक और प्रकाशकों की सराहना करते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से हिंदुत्व के वास्तविक अर्थ और उसके व्यापक दृष्टिकोण को जनसामान्य तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया गया है।
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि हिंदुत्व केवल एक धार्मिक अवधारणा नहीं बल्कि जीवन जीने की एक शैली है, जो सहिष्णुता, सह-अस्तित्व और सामाजिक समरसता पर बल देती है। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा में विविधता का सम्मान करते हुए सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता निहित है, यही कारण है कि भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से विभिन्न धर्मों, भाषाओं और परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए फल-फूल रही है।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी पुस्तक की विषयवस्तु पर अपने विचार साझा किए और इसे वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम के अंत में उपराष्ट्रपति ने सभी उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि यह पुस्तक पाठकों को भारतीय सभ्यता की गहन समझ प्रदान करेगी।
छवि: Vice President’s Secretariat (Wikimedia Commons)
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