केंद्र सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए विपणन सीजन 2027-28 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आयोजित Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) की बैठक में लिया गया।
सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम सहित प्रमुख रबी फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सके। सरकार का दावा है कि नई दरें अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत से डेढ़ गुना अधिक हैं, जो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है।
अधिकारियों के मुताबिक, गेहूं का समर्थन मूल्य सबसे अधिक बढ़ाया गया है, क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी रबी फसल मानी जाती है और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से इसका विशेष महत्व है। इसके अलावा तिलहन और दलहन फसलों के दाम बढ़ाकर सरकार किसानों को इनकी खेती के प्रति प्रोत्साहित करना चाहती है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह फैसला देश के करोड़ों किसान परिवारों को सीधा लाभ पहुंचाएगा। खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है, क्योंकि बढ़ती लागत के बीच उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
सरकार का यह भी कहना है कि खाद्यान्न भंडारण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए समय पर MSP की घोषणा जरूरी है, जिससे किसान अगली फसल की बुवाई की योजना पहले से बना सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन किसान संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि समय पर घोषित MSP से बुवाई के फैसले लेने में आसानी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में विभिन्न राज्यों में खरीद केंद्र स्थापित कर किसानों से सीधे फसल खरीदी जाएगी।
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