केंद्र सरकार ने देश की तटीय पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने और समुद्री संसाधनों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के लिए विस्तृत दिशानिर्देशों की घोषणा की है, जिससे तटीय राज्यों में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल बैठाया जा सकेगा।
मंत्रालय के अनुसार, यह मिशन देश की लंबी समुद्री सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए तैयार की गई एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। नए दिशानिर्देशों में तटीय क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्यों, मत्स्य पालन गतिविधियों और पर्यटन विकास को लेकर स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नियंत्रित तरीके से हो सके।
Bhupender Yadav ने इस अवसर पर कहा कि तटीय इलाकों में समुद्र के बढ़ते जलस्तर, कटाव और चक्रवाती तूफानों जैसी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन मिलकर एक साझा रणनीति के तहत काम करें। उन्होंने बताया कि मिशन 2.0 के तहत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाओं को अद्यतन किया जाएगा और वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा।
नए दिशानिर्देशों में यह भी प्रावधान किया गया है कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा समुदायों और पारंपरिक निवासियों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, मैंग्रोव वनों, प्रवाल भित्तियों और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि इन कदमों से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि तटीय अर्थव्यवस्था को भी स्थायी आधार मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 भारत की जलवायु अनुकूलन नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो सकता है। इससे न केवल आपदा प्रबंधन क्षमताओं में सुधार होगा, बल्कि तटीय राज्यों को अपने संसाधनों का समझदारी से उपयोग करने में भी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने सभी तटीय राज्यों से इन दिशानिर्देशों को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया है, ताकि आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम देखे जा सकें।
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