समुद्री मत्स्य अनुसंधान के क्षेत्र में देश की प्रमुख संस्था ICAR-CMFRI ने टूना मछली को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। संस्था ने आम जनता से अपील की है कि किसी एक विशेष क्षेत्र की मछलियों में परजीवी पाए जाने की खबरों के आधार पर पूरी तरह टूना मछली का सेवन बंद न करें।
दरअसल हाल के दिनों में कुछ इलाकों से पकड़ी गई मछलियों में परजीवी होने की सूचनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद उपभोक्ताओं में डर का माहौल बन गया था। कई लोग बाजार से टूना मछली खरीदने से भी परहेज करने लगे थे। इसी को देखते हुए संस्था ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत महसूस की।
संस्था के विशेषज्ञों के मुताबिक, समुद्री मछलियों में परजीवी मिलना कोई असामान्य बात नहीं है। यह प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है और यह किसी खास इलाके या मौसम में अधिक देखा जा सकता है। इसका मतलब यह कतई नहीं कि पूरे देश या समुद्र में पकड़ी जाने वाली सभी टूना मछलियां असुरक्षित हो गई हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि मछली को अच्छी तरह पकाने या उचित प्रसंस्करण करने से परजीवी और अन्य सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे सेवन पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है। इसलिए उपभोक्ताओं को घबराने की बजाय स्वच्छता और सही पकाने की प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।
संस्था ने यह भी चेताया कि इस तरह की भ्रामक जानकारी से न केवल उपभोक्ताओं में अनावश्यक भय फैलता है, बल्कि इसका सीधा असर मछुआरा समुदाय और मत्स्य व्यापार पर भी पड़ता है। टूना मछली का निर्यात और घरेलू बाजार में बिक्री, दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
संस्था ने आगे कहा कि वह लगातार समुद्री मछलियों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर निगरानी रखती है और किसी भी वास्तविक खतरे की स्थिति में समय रहते जनता को सूचित करती रहेगी। फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर टूना मछली का सेवन पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है, बशर्ते इसे सही तरीके से साफ करके और अच्छी तरह पकाकर खाया जाए।
संस्था ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया या असत्यापित स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें, बल्कि आधिकारिक और वैज्ञानिक स्रोतों से पुष्टि के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचें। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि मत्स्य उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी भी बची रहेगी।
छवि: sodai gomi (Wikimedia Commons)
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