राष्ट्रीय राजधानी Delhi के लिए इस साल सितंबर का महीना हवा की गुणवत्ता के लिहाज से बेहद सुखद साबित हुआ है। मौसम और प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखने वाली एजेंसियों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में यह पहली बार है जब सितंबर के दौरान शहर का औसत Air Quality Index (AQI) इतना कम दर्ज हुआ है। यह आंकड़ा उन तमाम रिपोर्टों को पीछे छोड़ता है, जो हर साल इस मौसम में राजधानी की हवा को लेकर चिंता जताती रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बारिश के लंबे दौर, हवा की तेज रफ्तार और पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी ने मिलकर प्रदूषण के स्तर को काबू में रखने में अहम भूमिका निभाई। सामान्यतः सितंबर के अंत तक हवा में नमी घटने और पड़ोसी राज्यों में खेतों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ने से AQI ऊपर की ओर जाने लगता है, लेकिन इस बार यह रुझान उलटा देखा गया।
पर्यावरण से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह सुधार केवल एक महीने की देन नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से चल रहे कई ठोस प्रयासों का नतीजा है। इनमें वाहनों के उत्सर्जन पर सख्ती, निर्माण गतिविधियों में धूल नियंत्रण के कड़े नियम, और औद्योगिक इकाइयों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है। साथ ही, हरित क्षेत्र बढ़ाने की योजनाओं और सड़कों की नियमित सफाई जैसे उपायों ने भी धूल के कणों को कम करने में मदद की।
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह सुधार केवल सितंबर तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में भी हवा की गुणवत्ता में बेहतरी का यह रुख जारी है, जो लंबे समय से प्रदूषण से जूझ रहे शहरवासियों के लिए राहत की खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान आगे भी बरकरार रहता है, तो सर्दियों के मौसम में आमतौर पर देखी जाने वाली गंभीर धुंध की स्थिति में भी कमी आ सकती है।
हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आगाह किया है कि यह सुधार स्थायी तौर पर तभी टिक सकता है जब सरकार और नागरिक दोनों मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को निरंतर लागू रखें। उनका कहना है कि मौसम के अनुकूल हालात ने इस बार मदद की है, लेकिन असली चुनौती आने वाली सर्दियों में पराली जलाने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित रखने की होगी। दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियां इस सुधार को बनाए रखने के लिए आगे की रणनीति पर काम कर रही हैं, जिसमें सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना शामिल है।
छवि: Shantum Singh (Pexels)
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