बिहार MLC चुनाव: जन सुराज की दस्तक और कांग्रेस की खींचतान से गड़बड़ाया सियासी गणित, त्रिकोणीय टक्कर के आसार
बिहार में विधान परिषद की सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नवंबर महीने में आठ MLC सीटें खाली होने जा रही हैं, जिसके चलते सभी प्रमुख राजनीतिक दल और गठबंधन अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इस बार का समीकरण पहले से कहीं ज्यादा उलझा हुआ नजर आ रहा है, क्योंकि जन सुराज पार्टी की चुनावी मैदान में सक्रिय एंट्री ने पुराने सियासी हिसाब-किताब को हिलाकर रख दिया है।
राज्य की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि जन सुराज के मैदान में उतरने से पारंपरिक गठबंधनों की गणित बिगड़ सकती है। पार्टी लगातार अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की कोशिश में लगी है, जिससे कई सीटों पर मुकाबला दो के बजाय तीन कोणों में बदलता दिख रहा है। यह स्थिति उन इलाकों में खास तौर पर देखने को मिल रही है, जहां वोटों का बंटवारा किसी भी दल की जीत या हार का फैसला कर सकता है।
दूसरी तरफ, महागठबंधन के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन और सीटों के बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि उन्हें गठबंधन के भीतर उचित हिस्सेदारी नहीं मिल पा रही, जिसके चलते आंतरिक नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस असंतोष का असर आने वाले दिनों में गठबंधन की एकजुटता पर पड़ सकता है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है।
विधान परिषद की इन आठ सीटों का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि ये उच्च सदन में दलों की ताकत और प्रभाव को सीधे प्रभावित करती हैं। इसलिए हर दल इन सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने-अपने स्तर पर जोर लगा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है, और अंतिम फैसला आने में अभी कुछ समय लग सकता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी, जब सभी दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेंगे। तब तक बिहार की सियासी फिजा में उलझन और अनिश्चितता बनी रहने की पूरी संभावना है। जन सुराज की सक्रियता और कांग्रेस के भीतर की खींचतान ने इस बार के MLC चुनाव को पहले से कहीं अधिक दिलचस्प और अनिश्चित बना दिया है।
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