भारत और New Zealand के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब आधिकारिक रूप से 20 अक्टूबर 2026 से अमल में आएगा। दोनों देशों की सरकारों ने इस तारीख पर सहमति जताते हुए बताया कि समझौते से जुड़ी सभी औपचारिकताएं और आंतरिक अनुमोदन प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
इस समझौते के तहत भारत और New Zealand के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में मौजूद कई बाधाओं को हटाया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे डेयरी उत्पाद, कृषि निर्यात, फार्मास्युटिकल्स, वस्त्र उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दोनों पक्षों को लाभ मिलने की संभावना है। शुल्क दरों में कटौती से भारतीय निर्यातकों को New Zealand के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा, वहीं New Zealand की कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक पहुंच आसान होगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह समझौता कई दौर की बातचीत के बाद अंतिम रूप ले सका है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने निवेश सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने और गुणवत्ता मानकों को लेकर विस्तृत चर्चा की थी। इस दौरान कृषि क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी सहमति बनाने का प्रयास किया गया, ताकि घरेलू किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस एफटीए के लागू होने से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्तमान में भारत और New Zealand के बीच व्यापार सीमित स्तर पर है, लेकिन इस समझौते के बाद निवेश प्रवाह और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही, शिक्षा, तकनीकी सहयोग और पर्यटन क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, समझौते की तारीख नजदीक आने के साथ ही दोनों देश आवश्यक प्रशासनिक तैयारियों में जुटे हुए हैं। उद्योग जगत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत की व्यापार नीति के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में भारत के अन्य देशों के साथ होने वाली व्यापार वार्ताओं के लिए भी एक मिसाल साबित हो सकता है।
Discover more from United India Live
Subscribe to get the latest posts sent to your email.




