सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद स्पीकर की कार्रवाई तेज, अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 सांसदों को भेजा गया पत्र
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों से जुड़े कथित दलबदल के मामले में राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और नोटिस के बाद अब लोकसभा सचिवालय ने भी मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए संबंधित सभी 20 सांसदों से जवाब तलब किया है। लोकसभा सचिवालय की ओर से मंगलवार को जारी पत्र में सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों से जुड़े कथित दलबदल के मामले में राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और नोटिस के बाद अब लोकसभा सचिवालय ने भी मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए संबंधित सभी 20 सांसदों से जवाब तलब किया है। लोकसभा सचिवालय की ओर से मंगलवार को जारी पत्र में सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।
यह कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दायर याचिका के बाद हुई है। अभिषेक बनर्जी ने 18 जून 2026 को याचिका दाखिल कर संबंधित सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची और लोकसभा में सदस्यों की अयोग्यता से संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
सात दिन में जवाब देना होगा
लोकसभा सचिवालय के पत्र के बाद अब सभी 20 सांसदों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। सांसदों की ओर से दिए गए जवाब को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा। इसके बाद मामले में आगे की संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया तय हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी जारी किया नोटिस
इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल और संबंधित 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पक्ष रखा, जबकि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर इस मामले में पहले ही कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अध्यक्ष को अलग से औपचारिक नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है और वह अदालत की सहायता करने के लिए उपलब्ध रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को स्वीकार किया।
क्या है पूरा विवाद?
मामला जून 2026 में उस समय सामने आया, जब काकोली घोष, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय और यूसुफ पठान समेत टीएमसी के 20 सांसदों ने कथित तौर पर एनसीपीआई में विलय का दावा किया था। इन सांसदों ने लोकसभा में एनसीपीआई के अलग समूह के रूप में बैठने की अनुमति भी मांगी थी।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस कदम को लेकर आपत्ति जताई गई और लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष संबंधित सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई गई।
दलबदल कानून के तहत होगी जांच
अभिषेक बनर्जी की याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। अब लोकसभा सचिवालय द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद मामला अगले चरण में पहुंच गया है।
मामले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि संबंधित 20 सांसदों की संख्या लोकसभा में टीएमसी के कुल सांसदों की संख्या के मुकाबले महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह विवाद केवल व्यक्तिगत सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर लोकसभा में टीएमसी की राजनीतिक स्थिति और पार्टी के संगठनात्मक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट और लोकसभा अध्यक्ष, दोनों स्तरों पर मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद अब सभी की नजरें 20 सांसदों के जवाब और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं।
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