नई दिल्ली | 12वां BRICS संसदीय मंच नई दिल्ली में संयुक्त घोषणा-पत्र अंगीकृत किए जाने के साथ संपन्न हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस मंच में सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, राष्ट्रीय संप्रभुता, परस्पर सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंच के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का स्थायी समाधान संघर्ष और युद्ध से नहीं, बल्कि संवाद, शांति और आपसी सहयोग से ही संभव है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन
संयुक्त घोषणा-पत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का समर्थन किया गया है। घोषणा-पत्र में इस मुद्दे का उल्लेख नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 13 में किया गया है।
यह मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका उनकी वर्तमान आर्थिक, राजनीतिक और जनसंख्या संबंधी स्थिति के अनुरूप होनी चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
आतंकवाद के मुद्दे पर भी संयुक्त घोषणा-पत्र में स्पष्ट रुख अपनाया गया। नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 40 के अनुसार, इसमें सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की निंदा की गई।
घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति और दोहरे मानदंडों को समाप्त करने पर जोर दिया गया। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की मांग करता रहा है।
डिजिटल तकनीक, AI और जलवायु परिवर्तन पर जोर
BRICS संसदीय मंच में विकास, तकनीक और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई। घोषणा-पत्र में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) रिपॉजिटरी के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक और जिम्मेदार इस्तेमाल तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए समान लेकिन पृथक उत्तरदायित्वों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत का पालन करने पर जोर दिया गया।
भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए सदस्य देशों के सर्वसम्मत समर्थन का भी उल्लेख किया गया।
“स्थायी समाधान युद्ध में नहीं, संवाद में है”: ओम बिरला
समापन भाषण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भाग लेने वाले देशों की परिस्थितियां, पृष्ठभूमि और चुनौतियां भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता BRICS की ताकत है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अस्थिरता, आर्थिक अनिश्चितता और क्षेत्रीय संघर्षों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत का दर्शन संवाद, शांति और सहयोग के माध्यम से समाधान तलाशने का संदेश देता है।
बिरला ने राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और सभी देशों को समान विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति का अर्थ केवल संघर्षों का अभाव नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान, न्याय और सभी के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना भी है। इसमें युवा पीढ़ी के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि संवाद, आम सहमति, जवाबदेही और जनता के विश्वास को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण मंच भी हैं।
उन्होंने दुनिया की संसदों से बदलते समय के अनुरूप अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनने का आह्वान किया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर उन्होंने कहा कि इन आधुनिक साधनों से संसदीय कामकाज अधिक सुगम बनाया जा सकता है और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, तकनीक का विकास मानवीय मूल्यों, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के अनुरूप होना चाहिए।
2027 की BRICS अध्यक्षता चीन को सौंपी
12वें BRICS संसदीय मंच के समापन पर ओम बिरला ने वर्ष 2027 के लिए BRICS की अध्यक्षता चीन को सौंपते हुए उसे शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन के नेतृत्व में सदस्य देशों के बीच सहयोग आगे भी मजबूत होगा।
मंच का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि दुनिया की संसदें शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। संयुक्त घोषणा-पत्र में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान देने और साझा चुनौतियों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता प्रमुख रूप से सामने आई।
स्रोत: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB)
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