देश में कैंसर रोगियों को राहत देने के मकसद से दवाओं पर मुनाफे की सीमा तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार की दवा मूल्य निर्धारण संस्था ने कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली चुनिंदा दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को सीमित करने का निर्णय लिया है, जिसका सीधा मकसद इन जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों को आम मरीजों की पहुंच में लाना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज लंबा और बेहद खर्चीला होता है। कई बार परिवार इलाज के खर्च की वजह से आर्थिक संकट में फंस जाते हैं, क्योंकि दवाओं की वास्तविक उत्पादन लागत और बाजार में बिकने वाली कीमत के बीच बड़ा अंतर देखा जाता रहा है। कई मामलों में थोक विक्रेताओं और फुटकर दुकानदारों द्वारा लिए जाने वाले मुनाफे की दर इतनी अधिक होती थी कि मरीज तक पहुंचते-पहुंचते दवा की कीमत कई गुना बढ़ जाती थी।
नई व्यवस्था के तहत अब दवा निर्माता से लेकर फुटकर विक्रेता तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में मुनाफे की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पक्ष तय सीमा से ज्यादा मार्जिन न ले सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से कई महंगी कीमोथेरेपी और अन्य कैंसर रोधी दवाओं के दाम में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
हालांकि दवा उद्योग से जुड़े कुछ संगठनों ने इस फैसले पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि मार्जिन में भारी कटौती से छोटे व्यापारियों और दवा वितरकों के कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंका भी बनी रहती है। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि केवल मार्जिन घटाने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी, बल्कि दवा निर्माण लागत, आयात शुल्क और कर ढांचे में भी सुधार की जरूरत है।
दूसरी ओर, मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह फैसला उम्मीद की किरण माना जा रहा है। कैंसर पीड़ितों के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया तो लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है। उन्होंने यह भी मांग की है कि सरकार इस नियम के क्रियान्वयन पर कड़ी निगरानी रखे, ताकि बाजार में कोई भी पक्ष नियमों की अनदेखी न कर सके।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मूल्य निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं पर भी इसी तरह की मूल्य नियंत्रण नीति लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों और आम जनता दोनों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह नई नीति बाजार में व्यावहारिक रूप से किस हद तक असर दिखा पाती है और क्या वाकई कैंसर मरीजों तक सस्ती दवाएं पहुंचना सुनिश्चित हो पाएगा।
छवि: PIB
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