नई दिल्ली। पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब एक नए और निर्णायक चरण में पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिषेक दीपके के नेतृत्व में चल रहा यह प्रदर्शन शनिवार को अनिश्चितकालीन धरने में बदल गया। तपती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में युवा जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील कर रहे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। पार्टी का आरोप है कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार से प्रभावित हो रही है, जिसका सबसे अधिक नुकसान देश के युवाओं को उठाना पड़ रहा है। अभिषेक दीपके का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है और इसके लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
धरना स्थल पर संबोधित करते हुए अभिषेक दीपके ने अपनी मांगों में एक और महत्वपूर्ण मांग जोड़ दी। उन्होंने कहा कि जिन नीट अभ्यर्थियों ने कथित रूप से शिक्षा व्यवस्था के दबाव, अनिश्चितता और लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाया है, उनके परिवारों को केंद्र सरकार की ओर से एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक मदद का मामला नहीं है, बल्कि उन परिवारों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी का भी प्रश्न है, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।
इस आंदोलन को उस समय और बल मिला जब लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती उसके युवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है और यदि इन्हीं क्षेत्रों में लोगों का विश्वास कमजोर होने लगे तो यह देश के भविष्य के लिए गंभीर संकेत है।
सोनम वांगचुक ने नेताओं और सरकारों को उनके वादों और नैतिक जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए कहा कि जनता के साथ किए गए वादों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और विश्वास कायम रखने का भी नाम है।

दिन भर चले प्रदर्शन के बाद शाम करीब चार बजे अभिषेक दीपके ने मंच से घोषणा की कि अब यह आंदोलन अनिश्चितकालीन धरने का रूप ले चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दिल्ली और आसपास के इलाकों के लोगों, छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से शाम छह बजे के बाद बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की।
जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं का कहना है कि यह केवल किसी एक परीक्षा या एक संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल है। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने कहा कि वर्षों की मेहनत और सपनों के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों का विश्वास बना रहे।
पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का स्वरूप और व्यापक हो सकता है, क्योंकि देशभर के छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर लगातार मुखर होते जा रहे हैं।
अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आंदोलन और उससे उठ रही मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है। फिलहाल जंतर-मंतर पर युवाओं का हुजूम डटा हुआ है और उनका कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
Discover more from UNITED INDIA LIVE
Subscribe to get the latest posts sent to your email.












