दिल्ली AQI: अक्टूबर महीने में आठ साल के दौरान सबसे बेहतर वायु गुणवत्ता, औसत सूचकांक 166 पर पहुंचा
राजधानी Delhi के निवासियों के लिए इस साल अक्टूबर का महीना सांस लेने के लिहाज से कुछ राहत भरा साबित हुआ है। शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते आठ वर्षों में इस बार अक्टूबर का औसत प्रदूषण स्तर सबसे कम दर्ज हुआ है। संबंधित विभागों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस महीने का औसत AQI 166 रहा, जो पिछले कई वर्षों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हर साल सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। पराली जलाने की घटनाएं, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और मौसम में बदलाव जैसे कारणों से अक्टूबर-नवंबर के महीनों में आमतौर पर हवा जहरीली होती चली जाती है। कई बार तो AQI का आंकड़ा 400 से भी ऊपर चला जाता है, जिसे गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे हालात में इस बार का 166 का औसत आंकड़ा थोड़ी राहत देने वाली खबर है, भले ही यह अभी भी ‘संतोषजनक’ श्रेणी से ऊपर और ‘मध्यम’ श्रेणी में आता हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें बेहतर मौसमी परिस्थितियां, हवा की तेज गति, समय पर हुई बारिश और सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कुछ कदम शामिल हो सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों से प्रशासन द्वारा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, पुराने वाहनों पर प्रतिबंध और पराली जलाने को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।
हालांकि पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञ इस आंकड़े को लेकर ज्यादा खुश होने से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि नवंबर का महीना अभी बाकी है, जो आमतौर पर दिल्ली में सबसे प्रदूषित महीनों में गिना जाता है। दिवाली के आसपास पटाखों का धुआं और सर्दियों में तापमान गिरने के साथ हवा में नमी बढ़ने से प्रदूषण के कण जमीन के करीब टिक जाते हैं, जिससे स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
फिर भी, आठ साल के आंकड़ों की तुलना में यह सुधार एक सकारात्मक संकेत जरूर माना जा रहा है। नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि यदि आने वाले महीनों में भी प्रशासन अपने प्रयासों को जारी रखे तो दिल्ली की हवा में स्थायी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल लोग इस राहत भरी खबर का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन सर्दियों के पूरे मौसम पर नजर बनाए रखने की जरूरत बताई जा रही है।
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