ICG की बड़ी कार्रवाई: समुद्र में 3,000 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ बरामद, अंतरराष्ट्रीय तस्कर नेटवर्क उजागर
भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने समुद्री सीमा पर एक बड़े अभियान को अंजाम देते हुए करीब 3,000 करोड़ रुपये कीमत के प्रतिबंधित नशीले पदार्थों को जब्त किया है। इस कार्रवाई के दौरान एक संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो लंबे समय से समुद्री मार्गों के जरिए मादक पदार्थों की खेप देश में पहुंचा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, ICG को खुफिया एजेंसियों से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर यह अभियान चलाया गया। कई दिनों तक चली निगरानी के बाद जब संदिग्ध जहाज समुद्री सीमा में सक्रिय पाया गया, तो तटरक्षक बल की टीमों ने तत्काल घेराबंदी करते हुए जहाज को रोका। तलाशी अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद हुए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इस अभियान में शामिल अधिकारियों ने बताया कि जब्त किया गया माल संभवतः विदेशी तस्करों के जरिए भारत होते हुए अन्य देशों में भेजा जाना था। इस पूरे नेटवर्क में कई देशों के तस्कर शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी पहचान के लिए जांच एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त था।
सुरक्षा एजेंसियों ने इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी जब्ती में से एक करार दिया है। भारतीय तटरक्षक बल के प्रवक्ता ने कहा कि यह कार्रवाई देश की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित बनाने और मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। जब्त किए गए मादक पदार्थों और गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ जारी है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
संबंधित एजेंसियां अब इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी संभावना तलाश रही हैं, ताकि इस गिरोह से जुड़े विदेशी सरगनाओं तक पहुंचा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां न केवल तस्करी नेटवर्क को कमजोर करती हैं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाने में भी मददगार साबित होती हैं। सरकार ने इस सफलता के लिए तटरक्षक बल की सराहना करते हुए आगे भी ऐसी कार्रवाइयां जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
छवि: Ministry of Defence (Wikimedia Commons)
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