भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश को एक अत्याधुनिक तकनीकी प्रणाली समर्पित की है, जो चक्रवाती तूफानों की पूर्व चेतावनी जारी करने और समुद्री मौसम से जुड़ी सेवाओं में त्वरित तथा सटीक निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगी। यह प्रणाली विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों, मछुआरों, बंदरगाह प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होने की उम्मीद है।
IMD के अधिकारियों के अनुसार, इस नई प्रणाली के माध्यम से समुद्र में उठने वाले तूफानों की गतिविधियों पर पहले से कहीं अधिक बारीकी से नजर रखी जा सकेगी। इससे चक्रवात के मार्ग, तीव्रता और संभावित प्रभाव क्षेत्र का आकलन अधिक सटीकता के साथ किया जा सकेगा, जिससे प्रशासन को समय रहते एहतियाती कदम उठाने में मदद मिलेगी।
यह प्रणाली समुद्री मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्णय लेने में सहयोग करेगी, ताकि संभावित जान-माल के नुकसान को कम से कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की आपदा पूर्व चेतावनी व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा तथा तटीय राज्यों में रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी गई है, ऐसे में इस तरह की उन्नत तकनीकी प्रणाली का होना समय की मांग थी। इस प्रणाली के जरिए समुद्री मौसम पूर्वानुमान को और बेहतर बनाया जा सकेगा, जिससे मछली पकड़ने के लिए समुद्र में जाने वाले मछुआरों को भी सही समय पर जानकारी मिल सकेगी और वे संभावित खतरों से बच सकेंगे।
IMD ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रणाली देश की आपदा प्रबंधन संरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग नीति निर्माण और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं को और प्रभावी बनाने में किया जाएगा। विभाग ने उम्मीद जताई है कि यह प्रणाली देश की समुद्री सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
छवि: PIB
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