नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दुष्कर्म तथा POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने वाली Fast Track Special Courts (FTSC) योजना को आगे बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह केंद्र प्रायोजित योजना अब वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर वित्त वर्ष 2030-31 तक, यानी कुल पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के मामलों में पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाना है। अक्सर देखा गया है कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या अधिक होने के कारण पीड़ित परिवारों को वर्षों तक इंसाफ का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में विशेष अदालतों के माध्यम से इन केसों का तेजी से निपटारा करना इस पहल का केंद्रीय लक्ष्य रहा है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद अब देशभर में स्थापित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों को अगले पांच वर्षों तक निरंतर वित्तीय और संस्थागत सहयोग मिलता रहेगा। इन अदालतों में विशेष रूप से POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को जल्द सजा सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के विस्तार से न केवल न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि समाज में अपराधियों के मन में कानून का डर भी बढ़ेगा। साथ ही, पीड़ितों और उनके परिवारों को लंबी कानूनी लड़ाई से राहत मिलेगी और उन्हें समय रहते न्याय हासिल करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना के तहत राज्यों को भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपने यहां इन विशेष न्यायालयों का सुचारू संचालन कर सकें।
गौरतलब है कि इससे पहले भी यह योजना अलग-अलग चरणों में लागू रही है, जिसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की स्थापना की जा चुकी है। अब पांच साल के इस नए विस्तार के साथ सरकार का इरादा न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना है।
छवि: KATRIN BOLOVTSOVA (Pexels)
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