उत्तराखंड के Pithoragarh जिले में भारत और Mongolia की सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास ‘Nomadic Elephant’ का आगाज़ हो गया है। दोनों देशों की सेनाओं के जवान इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए एकत्र हुए हैं, जो सामरिक सहयोग और आपसी समझ बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह सैन्य अभ्यास भारत और Mongolia के बीच रक्षा सहयोग की एक लंबी परंपरा का हिस्सा है, जो प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है। इस बार यह आयोजन ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके Pithoragarh में हो रहा है, जो प्रशिक्षण के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां दुर्गम क्षेत्रों में युद्ध कौशल निखारने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक आतंकवाद रोधी अभियानों, पहाड़ी युद्ध तकनीकों और संयुक्त कार्रवाई की रणनीतियों पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इसके अलावा जंगल में उत्तरजीविता, खोज एवं बचाव अभियान तथा आपसी समन्वय बढ़ाने वाले अभ्यासों को भी शामिल किया गया है। सैनिकों को एक-दूसरे की युद्ध शैली, हथियार प्रणाली और अभियान संचालन के तरीकों को समझने का अवसर मिलेगा।
रक्षा जगत के जानकारों के मुताबिक यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगा। भारत और Mongolia के बीच वर्षों से चला आ रहा यह सैन्य सहयोग क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक साबित होता रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने अभ्यास स्थल पर सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। इस दौरान क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां देखी जा सकेंगी, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में भी उत्सुकता का माहौल है। अभ्यास के समापन पर दोनों देशों की सेनाएं अपने अनुभव साझा करेंगी और भविष्य में और भी गहरे सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगी।
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