केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं ने देश के फार्मास्युटिकल, सक्रिय औषधि अवयव (Active Pharmaceutical Ingredients यानी API) और मेडिकल डिवाइस निर्माण क्षेत्र को नई दिशा दी है। इन योजनाओं के चलते घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला है और भारत की आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग PLI योजनाएं लागू की गई थीं, जिनका मकसद देश में ही कच्चे माल और तैयार उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना था। पहले भारत को API और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था, खासकर चीन से। अब इन योजनाओं के प्रभाव से घरेलू कंपनियां बड़ी मात्रा में इन उत्पादों का निर्माण करने लगी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इन योजनाओं के तहत कई नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिससे न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ी है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। मेडिकल डिवाइस सेक्टर में भी घरेलू कंपनियों ने आधुनिक तकनीक अपनाकर उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण बनाना शुरू किया है, जो पहले ज्यादातर आयात किए जाते थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन कदमों से भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत हुई है क्योंकि महामारी जैसी आपात स्थितियों में आयात बाधित होने का खतरा कम हो गया है। साथ ही, निर्यात के मोर्चे पर भी भारतीय कंपनियां अब वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो रही हैं।
सरकार का दावा है कि यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और निवेश आकर्षित करने तथा उत्पादन क्षमता को और विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है।
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