देश की संपूर्ण बुनियादी ढांचा व्यवस्था को एक सूत्र में पिरोने वाली महत्वाकांक्षी योजना PM GatiShakti ने अपने सफर के पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवधि में इस राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
पहले विभिन्न मंत्रालय और विभाग अपनी-अपनी परियोजनाओं पर अलग-अलग काम करते थे, जिससे अक्सर तालमेल की कमी, दोहराव और देरी जैसी समस्याएं सामने आती थीं। PM GatiShakti ने इस पुरानी कार्यप्रणाली को बदलते हुए एक डिजिटल मंच तैयार किया, जिस पर सभी संबंधित विभागों का डेटा एक साथ उपलब्ध रहता है। इससे योजनाकारों को यह देखने में आसानी होती है कि किसी क्षेत्र में पहले से कौन-सी परियोजनाएं चल रही हैं और नई परियोजना को कहां और कैसे जोड़ा जा सकता है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि अलग-अलग विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हुआ है, जिससे परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में लगने वाला समय काफी घट गया है। सड़क निर्माण के दौरान बार-बार खुदाई, एक ही इलाके में अलग-अलग विभागों द्वारा अलग-अलग समय पर काम करने जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल ने निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है, क्योंकि अब परियोजनाओं की योजना अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से बनाई जा रही है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, यानी सड़क, रेल और जलमार्ग को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में भी इस योजना का योगदान अहम रहा है, जिससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में इस प्रणाली का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र को भी इससे अधिक लाभ मिल सके। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह गति इसी तरह बनी रही, तो देश की समग्र बुनियादी ढांचा योजना आने वाले दशक में और अधिक समन्वित तथा कुशल हो सकती है।
छवि: PIB
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