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Ramsar Sites: Sukhna वेटलैंड और Sauj झील जुड़ने से भारत के रामसर स्थलों की तादाद 103 पर पहुंची

भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों यानी वेटलैंड्स की सूची में एक और बड़ा इज़ाफ़ा हुआ है। Chandigarh स्थित Sukhna आर्द्रभूमि और Uttar Pradesh की Sauj झील को अब औपचारिक रूप से रामसर स्थल घोषित कर दिया गया है। इस नई बढ़ोतरी के बाद देश में कुल रामसर स्थलों की संख्या 103 हो गई है, जो भारत की पर्यावरणीय धरोहर के लिहाज़ से एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

गौरतलब है कि रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका मकसद दुनियाभर की उन आर्द्रभूमियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है जो पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जल संसाधनों के नज़रिए से विशेष महत्व रखती हैं। किसी भी वेटलैंड को इस सूची में शामिल किए जाने का मतलब है कि अब उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संरक्षण मानकों के तहत संभाला जाएगा, जिससे वहां की वनस्पति, जीव-जंतु और जलस्रोतों को दीर्घकालिक सुरक्षा मिल सकेगी।

Sukhna आर्द्रभूमि लंबे समय से पक्षी विहार और जैव विविधता के केंद्र के तौर पर जानी जाती रही है। यहां मौसमी प्रवासी पक्षियों की तादाद हर साल देखी जाती है, और यह क्षेत्र स्थानीय पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। वहीं Uttar Pradesh की Sauj झील भी क्षेत्रीय जल प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के लिहाज़ से बेहद अहम स्थल मानी जाती है। इन दोनों स्थलों को रामसर सूची में जोड़े जाने से न सिर्फ उनकी वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय प्रशासन को इनके रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन और तकनीकी सहयोग भी मिल सकेगा।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वेटलैंड का रामसर सूची में शामिल होना उसके संरक्षण की दिशा में पहला बड़ा कदम होता है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को इन स्थलों के इर्द-गिर्द होने वाले अतिक्रमण, प्रदूषण और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण रखना होगा, ताकि इनकी प्राकृतिक संरचना और पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।

भारत में रामसर स्थलों की यह बढ़ती संख्या देश की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही हैं। बीते कुछ वर्षों में अलग-अलग राज्यों से कई वेटलैंड्स को इस सूची में शामिल किया गया है, जिससे भारत आज एशिया के उन अग्रणी देशों में शुमार हो गया है जहां रामसर स्थलों की संख्या सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में आगे भी ठोस कदम उठाए जाने की ज़रूरत है, ताकि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के बढ़ते दबाव के बीच देश की जल संपदा और जैव विविधता सुरक्षित रह सके।


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