केंद्र सरकार ने निर्यातकों को राहत देते हुए रिमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स यानी RoDTEP योजना की समय-सीमा को आगे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में इस फैसले की जानकारी दी गई है, जिसका मकसद देश से बाहर भेजे जाने वाले उत्पादों पर लगने वाले विभिन्न शुल्कों और करों का बोझ कम करना है।
यह योजना निर्यातकों को उन छिपे हुए करों और शुल्कों की भरपाई करने में मदद करती है, जो उत्पादन प्रक्रिया के दौरान चुकाने पड़ते हैं लेकिन अभी तक किसी अन्य व्यवस्था के तहत वापस नहीं मिल पाते। सरकार का कहना है कि इस कदम से निर्यातकों को आने वाले समय में भी निरंतरता और स्थिरता मिलेगी, जिससे वे अपने व्यापारिक फैसले लंबी अवधि को ध्यान में रखकर ले सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए यह योजना अहम भूमिका निभा रही है। कोविड महामारी के बाद से वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए सरकार की यह पहल राहत भरी मानी जा रही है।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इस विस्तार का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे निर्यात क्षेत्र में भरोसा बढ़ेगा और नई योजनाओं पर निवेश करने में मदद मिलेगी। कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कृषि उत्पादों से जुड़े निर्यातक इस योजना का विशेष रूप से लाभ उठाते रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत मिलने वाली दरों और शर्तों की समीक्षा समय-समय पर की जाती रहेगी, ताकि बदलते आर्थिक हालात के अनुसार इसे प्रासंगिक बनाए रखा जा सके। मंत्रालय ने निर्यातकों से अपील की है कि वे योजना से जुड़े नियमों का पालन करते हुए इसका अधिकतम लाभ उठाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तार से भारत के कुल निर्यात आंकड़ों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। आने वाले महीनों में इस योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी और जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
छवि: Ankittt Bhattacharjee (Pexels)
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