सुप्रीम कोर्ट मार्च: भारी सुरक्षा को धता बताकर कोर्ट पहुंचे राहुल गाँधी, दिल्ली की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
भारी सुरक्षा तंत्र को छकाकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे ‘इंडिया’ ब्लॉक के दिग्गज: एसआईआर रद्द करने की मांग, दिल्ली की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
नई दिल्ली (न्यूज़ डेस्क)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘वोट बचाओ’ आंदोलन सोमवार को अपने चरम पर पहुंच गया। राजधानी दिल्ली में चारों तरफ से की गई सख्त किलेबंदी और अभूतपूर्व सुरक्षा बंदोबस्त को धता बताते हुए नेता विपक्ष राहुल गाँधी पुलिस को छकाकर तिलक मार्ग के रास्ते सुप्रीम कोर्ट के गेट ‘बी’ तक जा पहुंचे।
राहुल गांधी के आह्वान पर देश भर से आए लाखों कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं के हुजूम के चलते कनॉट प्लेस सर्किल पूरी तरह चक्काजाम हो गया। दिल्ली की सड़कें “वोट चोर गद्दी छोड़” के गगनभेदी नारों से गूंज उठीं, जबकि मार्च का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के चेहरों पर गजब का आत्मविश्वास नजर दिखाई दे रहा था।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दिग्गज, सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में जांच समिति की मांग
भगवान दास मार्ग पर पुलिस की धक्का-मुक्की और इंडिया गेट सर्किल पर रोके जाने के बावजूद, विपक्षी नेता वैकल्पिक रास्तों से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। परिसर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल के साथ अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले समेत ‘इंडिया’ ब्लॉक की पूरी शीर्ष कमान मौजूद रही।

लाइव लॉ और समाचार एजेंसियों के अनुसार, शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में ‘इंडिया’ ब्लॉक के प्रमुख नेताओं (खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी राजा, महुआ मांझी, सुप्रिया सुले, और ईटी मोहम्मद बशीर) ने चुनाव आयोग से जुड़ी निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
एसआईआर (SIR) पर रोक: 24 जून 2025 से शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को तुरंत रोकने और इसके तहत जीते गए चुनावों को रद्द कर बैलेट पेपर प्रणाली बहाल करने की मांग।
- पारदर्शिता और एक्सेस लॉग: चुनाव आयोग के एसआईआर से जुड़े सभी फैसले, फाइलें, बैठकों के मिनट्स, नोटिंग और ECINET व ERONET के एक्सेस लॉग सार्वजनिक किए जाएं।
- संवैधानिकता की जांच: जांच की जाए कि क्या चुनाव आयोग के ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, 2023 के चुनाव आयोग कानून और ऐतिहासिक टीएन शेषन बनाम भारत संघ मामले के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं।
- बिना नोटिस नाम हटाने पर रोक: बिना नोटिस दिए और बिना उचित सुनवाई का मौका दिए किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए। हटाए गए सभी मतदाताओं की बूथवार सूची कारण सहित प्रकाशित हो।
- स्वतंत्र जांच समिति: मतदाता सूची में हुए बदलावों और गड़बड़ियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए और दोषियों पर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के तहत कार्रवाई हो।

“यह पूरे देश की आवाज है, न्याय के मंदिर से अन्याय नहीं होगा”
याचिका दाखिल करने के बाद नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किए:
- मल्लिकार्जुन खड़गे: मार्च की तस्वीरें साझा करते हुए एक्स (X) पर लिखा, “वोट चोरी के खिलाफ इंडिया ब्लॉक की लड़ाई जारी रहेगी। यह जनसैलाब गवाह है, मोदी-शाह की जवाबदेही तय होकर रहेगी!”
- डीके शिवकुमार (मुख्यमंत्री, कर्नाटक): “यह सिर्फ ‘इंडिया’ गठबंधन की नहीं, बल्कि पूरे देश की आवाज है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद जीते गए चुनाव रद्द होने चाहिए। मुझे उम्मीद है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और उनकी टीम संविधान और हर आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेगी।”
बीजेपी का पलटवार
उधर, शाम को आयोजित एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी और विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर राजधानी में ‘अराजकता फैलाने’ का गंभीर आरोप लगाया। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद सभी शीर्ष विपक्षी नेता वापस लौट गए हैं, लेकिन इस प्रदर्शन ने देश की चुनावी राजनीति और कानूनी व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
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