नशा मुक्त भारत अभियान ने छुआ 35 करोड़ से ज़्यादा लोगों का आंकड़ा, युवाओं और महिलाओं की भारी भागीदारी
देशभर में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 35 करोड़ से अधिक नागरिकों तक अपनी पहुंच बना ली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस जनजागरूकता मुहिम ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है, जिसमें सबसे उल्लेखनीय भागीदारी युवाओं और महिलाओं की रही है।
उपलब्ध आंकड़ों पर नज़र डालें तो अभियान के तहत अब तक 13.94 करोड़ से ज़्यादा युवा इस मुहिम से सीधे जुड़ चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश की नई पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने में यह कार्यक्रम काफी हद तक कारगर साबित हुआ है। इसके अलावा 10.86 करोड़ महिलाओं ने भी इस अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है, जो यह संकेत देता है कि नशा मुक्ति की इस लड़ाई में महिलाएं भी बराबर की भागीदार बन रही हैं।
सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों को भी इस राष्ट्रव्यापी मुहिम से बड़े पैमाने पर जोड़ा गया है। अभियान से संबंधित विभिन्न आउटरीच गतिविधियों के ज़रिए देशभर के 32 लाख से अधिक स्कूल, कॉलेज और शिक्षण केंद्र इस कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं। इन संस्थानों में सेमिनार, कार्यशालाएं, जागरूकता रैलियां और परिचर्चाएं आयोजित कर विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि युवा वर्ग और महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या में भागीदारी यह साबित करती है कि समाज अब नशे की समस्या को गंभीरता से लेने लगा है। स्कूल-कॉलेजों में चलाए जा रहे विशेष कार्यक्रमों के ज़रिए छात्रों को न सिर्फ नशे के दुष्परिणामों की जानकारी दी जा रही है, बल्कि उन्हें इस सामाजिक बुराई के खिलाफ मुखर होकर आवाज़ उठाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके ज़रिए समाज में एक दीर्घकालिक बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां नशे की गिरफ्त से पूरी तरह मुक्त रह सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर जनभागीदारी वाले अभियान आने वाले वर्षों में नशे की लत से जूझ रहे लोगों की संख्या घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आने वाले समय में इस अभियान के दायरे को और विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें ग्रामीण इलाकों और दूरदराज़ के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि देश का कोई भी हिस्सा इस जागरूकता मुहिम से अछूता न रह जाए।
छवि: PIB
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