पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध Buxa Tiger Reserve में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इस अभ्यारण्य में पहली बाघिन को जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करने के लिए छोड़ा गया। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करना है जहां वर्षों से उनकी संख्या बेहद कम हो गई थी या वे पूरी तरह विलुप्त हो चुके थे।
Buxa Tiger Reserve लंबे समय से बाघों की घटती संख्या को लेकर चिंता का विषय रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों का मानना है कि इस क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र बाघों के प्राकृतिक आवास के लिए उपयुक्त है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में शिकार, जंगल में मानवीय हस्तक्षेप और आवास के नुकसान के चलते यहां बाघों की उपस्थिति लगभग समाप्त हो गई थी। ऐसे में इस बाघिन को यहां छोड़ा जाना न केवल एक प्रतीकात्मक शुरुआत है, बल्कि इससे क्षेत्र में बाघों के प्रजनन और स्थायी निवास की उम्मीद भी जगी है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर बाघ संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ने इस अवसर को राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करती रहेगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघिन को छोड़ने से पहले उसकी पूरी स्वास्थ्य जांच की गई और उसे एक निगरानी प्रणाली से भी लैस किया गया है, ताकि उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। इससे वन्यजीव विशेषज्ञों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नया वातावरण बाघिन के लिए कितना अनुकूल साबित हो रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आने वाले समय में इसी कार्यक्रम के तहत और बाघों को भी इस अभ्यारण्य में बसाया जाएगा, ताकि यहां एक स्थायी और स्वस्थ बाघ आबादी विकसित हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के पुनर्वास कार्यक्रम न केवल बाघों की संख्या बढ़ाने में सहायक होते हैं, बल्कि इससे संबंधित क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह पूरे जंगल पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
छवि: Tisha Mukherjee (Wikimedia Commons)
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