केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं पर व्यापार मार्जिन को तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) की ओर से लिए गए इस फैसले का मकसद मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है, जो लंबे समय से महंगी दवाओं के कारण परेशान रहते हैं।
सूत्रों के अनुसार, दवा निर्माता कंपनी से लेकर अस्पताल या मेडिकल स्टोर तक पहुंचने के बीच इन दवाओं पर जो मुनाफा जोड़ा जाता है, उसमें भारी असमानता देखी गई थी। कई मामलों में यह मार्जिन इतना अधिक था कि एक ही दवा की कीमत अलग-अलग जगहों पर कई गुना फर्क दिखाती थी। इसी विसंगति को दूर करने के लिए सरकार ने ट्रेड मार्जिन पर सीमा तय करने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं पहले से ही बेहद महंगी होती हैं और इलाज लंबा चलने की वजह से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने से सीधे तौर पर दवाओं के खुदरा मूल्य में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न सिर्फ मरीजों को राहत देगा बल्कि फार्मा सेक्टर में पारदर्शिता भी बढ़ाएगा। इससे पहले भी सरकार कई आवश्यक दवाओं और मेडिकल डिवाइस पर मूल्य नियंत्रण के उपाय लागू कर चुकी है, जिनका सकारात्मक असर बाजार में देखा गया है।
मरीज संगठनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम समय की मांग थी। उनका कहना है कि कैंसर के इलाज की बढ़ती लागत के चलते कई परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं, और इस तरह के नियामक हस्तक्षेप से उन्हें काफी सहूलियत मिलेगी।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस सूची में शामिल सभी 137 दवाओं पर नई मार्जिन सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा और इसकी नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि दवा कंपनियां या विक्रेता इस व्यवस्था का उल्लंघन न कर सकें।
Discover more from United India Live
Subscribe to get the latest posts sent to your email.




