बंधुआ मजदूर मामले में NHRC सख्त, Telangana में फंसे UP परिवार की रिपोर्ट पर लिया स्वतः संज्ञान
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने Telangana राज्य के Medchal-Malkajgiri जिले से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। मामला उत्तर प्रदेश के एक परिवार से जुड़ा है, जिसके 12 सदस्यों को कथित रूप से एक निर्माण स्थल पर करीब एक साल तक बंधुआ मजदूरी के हालात में रखे जाने की जानकारी सामने आई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस परिवार को निर्माण कार्य में लगाया गया था, जहां उन्हें न तो उचित मेहनताना दिया जा रहा था और न ही आने-जाने की स्वतंत्रता थी। पीड़ितों को लंबे समय तक अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप है, जो भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर हनन का मामला है। NHRC ने संबंधित राज्य प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें यह बताया जाना है कि पीड़ित परिवार को किस तरह की परिस्थितियों में रखा गया था और उनके बचाव व पुनर्वास के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और पुनर्वास सहायता दिलाने पर भी जोर दिया गया है।
श्रमिक अधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि देशभर में ऐसे निर्माण स्थलों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि प्रवासी मजदूरों के शोषण को रोका जा सके। उत्तर प्रदेश सरकार से भी अपेक्षा की जा रही है कि वह अपने राज्य के इस प्रभावित परिवार के पुनर्वास में सहयोग करे।
छवि: RAJA HASAN (Pexels)
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