राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने Maharashtra के Nashik जिले से सामने आई एक चिंताजनक रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्टों के रिसाव के कारण आसपास के गांवों में बोरवेल का पानी जहरीला हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
आयोग ने इस मामले को मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखते हुए कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। प्रदूषित पानी के सेवन से त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियां और दीर्घकालिक रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने की आशंका जताई गई है। गांव के कई परिवार पहले से ही जल जनित बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
NHRC ने Maharashtra सरकार के मुख्य सचिव और संबंधित जिला प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने जानना चाहा है कि प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई, प्रभावित गांवों में पेयजल आपूर्ति के वैकल्पिक इंतजाम किए गए या नहीं, और दूषित पानी पीने से बीमार हुए लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई या नहीं।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इलाके में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला कचरा लंबे समय से बिना उचित उपचार के जमीन में समाता रहा है, जिसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ा है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर भी निगरानी में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि रिपोर्ट में लापरवाही या प्रशासनिक विफलता सामने आती है तो दोषी अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। फिलहाल प्रभावित गांवों के निवासी प्रशासन से तत्काल राहत और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
छवि: Harry Ho (Pexels)
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