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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में एनजीटी के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को किया संबोधित

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ के समापन सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने विचार साझा किए। इस दो दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के पर्यावरण विशेषज्ञों, न्यायविदों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया, जिन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों पर गहन विमर्श किया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल किसी एक देश या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह पूरी मानवता का साझा दायित्व है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव आज सीमाओं से परे जाकर संपूर्ण विश्व को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए इससे निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सामूहिक प्रयास अनिवार्य हो गए हैं।

राष्ट्रपति ने एनजीटी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण न्याय के क्षेत्र में इस संस्था ने महत्वपूर्ण मील के पत्थर स्थापित किए हैं और देश में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में इसकी भूमिका सराहनीय रही है। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श को केवल चर्चा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे ठोस नीतिगत कदमों और जमीनी क्रियान्वयन में बदला जाए।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीने की संस्कृति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय दर्शन में प्रकृति को पूजनीय माना गया है और यही सोच आज भी सतत विकास की दिशा में मार्गदर्शक बन सकती है। राष्ट्रपति ने युवाओं और वैज्ञानिक समुदाय से नवाचार आधारित समाधान खोजने का भी आह्वान किया, जिससे आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में जलवायु अनुकूलन, प्रदूषण नियंत्रण, वन संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोजन में शामिल विशेषज्ञों ने आगामी वर्षों के लिए ठोस रणनीतियां और सुझाव प्रस्तुत किए, जिन्हें आगे नीति निर्माण में शामिल करने की बात कही गई। समापन समारोह में एनजीटी के वरिष्ठ अधिकारियों, न्यायिक सदस्यों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने राष्ट्रपति के संबोधन को सराहा और इसे भविष्य की दिशा तय करने वाला बताया।

छवि: President’s Secretariat (Wikimedia Commons)


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