India और Myanmar की सेनाओं ने मिलकर एक ऐतिहासिक पहल करते हुए अपने पहले त्रि-सेवा संयुक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभ्यास ‘Raahat Mitra’ का शुभारंभ किया है। यह अभ्यास दोनों पड़ोसी देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों की संयुक्त भागीदारी देखी जा रही है।
रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित और समन्वित राहत कार्य सुनिश्चित करना है। भूकंप, बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं के दौरान दोनों देशों की सेनाएं किस प्रकार मिलकर काम कर सकती हैं, इसका व्यावहारिक अभ्यास इस आयोजन के केंद्र में है। प्रशिक्षण के दौरान बचाव अभियान, चिकित्सा सहायता, राहत सामग्री का वितरण और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बहाल करने जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए India अपने पड़ोसी देशों के साथ सामरिक और कूटनीतिक रिश्तों को भी मजबूत करना चाहता है। Myanmar के साथ सीमा साझा करने वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच इस तरह का समन्वय भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने में सहायक सिद्ध होगा।
रक्षा जानकारों के मुताबिक, हिंद महासागर क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को देखते हुए इस तरह के संयुक्त अभ्यासों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ‘Raahat Mitra’ के जरिए India यह संदेश देना चाहता है कि वह क्षेत्रीय मानवीय सहायता में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरना चाहता है। अभ्यास में शामिल सैन्य दल विभिन्न परिदृश्यों के तहत मॉक ड्रिल करेंगे, जिसमें हवाई मार्ग से राहत सामग्री गिराना, समुद्री मार्ग से बचाव अभियान चलाना और जमीनी स्तर पर राहत शिविर स्थापित करना शामिल है।
दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने इस मौके पर कहा कि यह अभ्यास आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा देगा। आने वाले वर्षों में इस तरह के अभ्यासों को और व्यापक रूप दिया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत किया जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि यह पहल दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ India की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के अनुरूप भी है, जिसके तहत पड़ोसी देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
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