नई दिल्ली। चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर बहस तेज हो गई है। 23 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान आयोग के फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में फॉर्म 6, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और ECINet से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हुआ। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और उनके खिलाफ प्रदर्शन भी किए।चुनाव आयोग: दो आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया पर 14 बार जताई आपत्ति, EC ने दी सफाई
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 24 सितंबर को ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। वहीं CJP की ओर से भी यह कहा गया कि यदि ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। ये राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से लगाए गए आरोप और घोषित कार्यक्रम हैं।SIR को लेकर चुनाव आयोग के अहम फैसले, दिल्ली में दावे-आपत्तियों की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ी
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में आयोग के फैसलों, SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
SIR और ECINet बने प्रमुख मुद्दे
चुनाव आयोग के भीतर कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6, SIR और ECINet से जुड़े फैसलों का मुद्दा सामने आया है। इन घटनाक्रमों ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया है। आयोग ने अपने हालिया स्पष्टीकरण में कहा है कि उसके महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर हैं। अदालत में यह मामला पहुंचने के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, SIR और उससे जुड़े उठाए गए सवालों पर न्यायिक रुख महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल इन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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