92 गीगावॉट बैटरी स्टोरेज योजना: केंद्रीय कैबिनेट ने दी 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी
नई दिल्ली। देश में नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 92 गीगावॉट क्षमता वाली ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के निर्माण हेतु 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (Viability Gap Funding) योजना को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।
सरकार की इस पहल का मकसद सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय स्रोतों से मिलने वाली बिजली को भंडारित करने की क्षमता बढ़ाना है, ताकि जरूरत के समय बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से हो सके। बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां (BESS) स्थापित करने से बिजली ग्रिड की स्थिरता बेहतर होगी और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में आने वाली रुकावटें कम होंगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना के तहत निजी और सरकारी दोनों क्षेत्र की कंपनियों को बैटरी भंडारण परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। परियोजनाओं के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख सरकारी एजेंसियां भूमिका निभाएंगी। इससे देश में निवेश आकर्षित होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को तेज गति से हासिल करने में मददगार साबित होगा। देश 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में बड़ा इजाफा करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है, और इसके लिए मजबूत भंडारण अवसंरचना अनिवार्य मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रिड-स्केल बैटरी स्टोरेज सिस्टम से बिजली कटौती की समस्या कम होगी और कार्बन उत्सर्जन घटाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी बल मिलेगा।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले महीनों में इस योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिसमें परियोजना की समय-सीमा, निवेश की शर्तें और सब्सिडी वितरण प्रक्रिया स्पष्ट की जाएगी। यह योजना देश के ऊर्जा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
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