Great Indian Bustard: 10 साल की मेहनत के बाद Jaisalmer में जंगल में छोड़े गए संरक्षित बस्टर्ड, केंद्रीय मंत्री और CM रहे मौजूद
राजस्थान के Jaisalmer जिले में स्थित Desert National Park एक बड़े वन्यजीव संरक्षण अभियान का गवाह बना, जहां एक दशक की निरंतर मेहनत के बाद कैद में पाले गए Great Indian Bustard पक्षियों को खुले जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की गई। इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री दोनों मौजूद रहे और उन्होंने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
Great Indian Bustard को भारत के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षियों में गिना जाता है। इसकी घटती संख्या को देखते हुए पिछले दस वर्षों से वैज्ञानिकों, वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर एक विशेष प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रम चलाया था। इस कार्यक्रम के तहत इन पक्षियों को नियंत्रित वातावरण में पाला गया, ताकि इनकी संख्या बढ़ाई जा सके और बाद में इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने बताया कि वर्षों की वैज्ञानिक मेहनत, समर्पण और सरकार के सहयोग से यह संभव हो पाया है कि इतनी दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को फिर से उनके असली आवास में भेजा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इस तरह की संरक्षण परियोजनाओं को आगे भी पूरा समर्थन देती रहेगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने Desert National Park को इस पक्षी के संरक्षण के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बताया और कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने वन विभाग की टीम और वैज्ञानिकों की भी सराहना की, जिन्होंने इतने वर्षों तक धैर्य के साथ इस परियोजना पर काम किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि Great Indian Bustard की संख्या बीते कुछ दशकों में तेजी से घटी है, जिसके पीछे आवास का नुकसान, शिकार और बिजली की तारों से होने वाली दुर्घटनाएं प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में कैद में पाले गए पक्षियों को जंगल में छोड़ना इस प्रजाति को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि छोड़े गए पक्षियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे प्राकृतिक वातावरण में सफलतापूर्वक ढल सकें।
इस मौके पर मौजूद वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि आने वाले समय में और भी पक्षियों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सफलता से न केवल Rajasthan बल्कि पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगी है।
छवि: Original: SVKMBFLY; this edit: MPF (Wikimedia Commons)
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