केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने उन करदाताओं को बड़ी राहत दी है जिनके खातों का ऑडिट कराया जाना अनिवार्य है। आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आय विवरण यानी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। पहले यह समय-सीमा 31 अक्टूबर, 2026 तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 21 नवंबर, 2026 कर दिया गया है।
इस फैसले से उन तमाम व्यापारियों, कंपनियों और पेशेवरों को सुविधा मिलेगी जिनके व्यवसाय या पेशे की आमदनी पर लेखा-परीक्षा यानी ऑडिट कराना कानूनी रूप से आवश्यक होता है। ऐसे करदाताओं को सामान्य श्रेणी के करदाताओं की तुलना में रिटर्न भरने के लिए पहले से ही अधिक समय दिया जाता रहा है, क्योंकि उन्हें अपने खातों की जांच पूरी करवाकर ही विवरण प्रस्तुत करना होता है।
CBDT द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह विस्तार केवल उन्हीं व्यक्तियों और संस्थाओं पर लागू होगा जिनके लिए ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है। सामान्य वेतनभोगी करदाताओं या ऐसे व्यक्तियों के लिए, जिनके खाते ऑडिट के दायरे में नहीं आते, समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम करदाताओं को अपने वित्तीय दस्तावेज तैयार करने, ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने और सही तरीके से रिटर्न भरने के लिए अतिरिक्त समय देने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे न केवल करदाताओं पर से दबाव कम होगा, बल्कि गलतियों की संभावना भी घटेगी।
उल्लेखनीय है कि हर वर्ष निर्धारण अवधि के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर सलाहकारों पर ऑडिट रिपोर्ट और रिटर्न फाइलिंग का भारी दबाव रहता है। ऐसे में समय-सीमा बढ़ने से पेशेवरों और उद्यमियों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। संबंधित करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे नई समय-सीमा का ध्यान रखते हुए समय रहते अपने दस्तावेज तैयार कर लें, ताकि अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सके।
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