राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर सांस लेने लायक नहीं रह गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 382 के आंकड़े पर पहुंचते ही हालात ‘अति खराब’ श्रेणी में दर्ज किए गए, जिसके तुरंत बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को सख्त कदम उठाने पड़े। आयोग ने पूरे दिल्ली-NCR क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण को बिना किसी देरी के लागू करने का आदेश जारी कर दिया है।
सर्दियों की दस्तक के साथ ही हर साल की तरह इस बार भी दिल्ली और आसपास के शहरों में धुंध और प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा पार करने लगा है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों के अनुसार, हवा की धीमी गति, तापमान में गिरावट और पराली जलाने की घटनाओं ने मिलकर स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए CAQM ने बिना समय गंवाए तीसरे चरण की पाबंदियां लागू करने का फैसला लिया।
GRAP के चरण-III के तहत निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है, ताकि धूल से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। इसके अलावा खनन कार्यों पर भी प्रतिबंध रहता है। वाहनों से जुड़े मानकों को भी सख्त किया जाता है, जिसमें BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों के परिचालन पर रोक शामिल है। स्कूलों में भी एहतियात के तौर पर कक्षाओं को हाइब्रिड मोड में संचालित करने जैसे निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि बच्चों को प्रदूषित हवा से बचाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि लगातार बढ़ता AQI सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा देता है। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें और जरूरी न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें।
CAQM ने संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे GRAP के इस चरण का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि वे व्यक्तिगत वाहनों के इस्तेमाल को सीमित करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें और किसी भी तरह के खुले में कूड़ा या पराली जलाने से परहेज करें। आयोग लगातार वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है और स्थिति के अनुसार आगे और कड़े कदम उठाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
छवि: NASA/GSFC/LaRC/JPL, MISR Team (Wikimedia Commons)
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