India-EU के बीच Horizon Europe कार्यक्रम में साझेदारी को लेकर अहम वार्ता पूरी, विज्ञान-तकनीक सहयोग को मिलेगी नई दिशा
भारत और European Union के बीच वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल में, दोनों पक्षों ने Horizon Europe कार्यक्रम से भारत को औपचारिक रूप से जोड़ने संबंधी वार्ता प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह कार्यक्रम European Union की सबसे बड़ी अनुसंधान एवं नवाचार पहल मानी जाती है, जिसके तहत सदस्य और सहयोगी देशों के वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों तथा उद्योगों को संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलता है।
अधिकारियों के अनुसार, कई दौर की चर्चाओं के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि भारत अब इस विशाल कार्यक्रम में एक सहयोगी देश के रूप में भाग ले सकेगा। इससे भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को यूरोपीय समकक्षों के साथ मिलकर अनुसंधान परियोजनाओं में शामिल होने का सीधा रास्ता खुल जाएगा। यह समझौता विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा जो दोनों पक्षों के लिए प्राथमिकता रखते हैं, जैसे स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान।
विशेषज्ञों का मानना है कि Horizon Europe से जुड़ाव भारत के लिए वैज्ञानिक क्षमता निर्माण की दृष्टि से बेहद लाभकारी साबित होगा। इससे न केवल भारतीय शोध संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय संसाधन और तकनीकी ज्ञान उपलब्ध होगा, बल्कि युवा वैज्ञानिकों को वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलेगा। दोनों पक्षों ने इस साझेदारी को आपसी विश्वास और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों का प्रतीक बताया है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता भारत और European Union के बीच पहले से चल रहे व्यापार, तकनीक और सुरक्षा संबंधी संवाद का ही विस्तार है। हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने Trade and Technology Council जैसे मंचों के माध्यम से आपसी सहयोग को गहरा करने के कई प्रयास किए हैं, और Horizon Europe से जुड़ाव इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब दोनों पक्षों द्वारा औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद भारतीय संस्थान आधिकारिक रूप से इस कार्यक्रम के तहत फंडिंग और परियोजनाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस पहल से भारत के वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर अनुसंधान सहयोग के नए द्वार खुलने की संभावना है।
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