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अमेरिका से इजरायल तक मुस्लिम और अरब राजनीतिक ताक़त का उभार! क्या बदलने जा रहा है दुनियां की राजनीति का समीकरण?

नई दिल्ली। दुनिया की राजनीति में एक नया बदलाव दिखाई देने लगा है। अमेरिका से लेकर इजरायल तक मुस्लिम और अरब समुदाय की राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में अब्दुल एल-सईद ने सीनेट चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं इजरायल के 27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव में अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों ने संसद में 19 सीटें जीतकर अपनी ताकत का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।

इन दोनों घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। सवाल यह है कि क्या पश्चिमी देशों की राजनीति में मुस्लिम और अरब समुदाय अब निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच रहे हैं?

अमेरिका में मुस्लिम उम्मीदवार की ऐतिहासिक जीत

अमेरिका के मिशिगन राज्य से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सईद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम का इतिहास बनाया है।

चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों की ओर से एल-सईद की धार्मिक पहचान को लेकर भी टिप्पणियां की गई थीं। इसके बावजूद उनकी जीत ने अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम समुदाय की बढ़ती स्वीकार्यता और राजनीतिक सक्रियता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

इस चुनाव में अरब-अमेरिकी और फिलिस्तीन समर्थक उम्मीदवारों को भी कई जगह सफलता मिली है।

इजरायल में अरब दलों ने जीतीं 19 सीटें

इजरायल का चुनाव भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव में अरब नेतृत्व वाले दो प्रमुख दलों जॉइंट लिस्ट और राम ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं।

इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। चुनाव परिणामों के अनुसार नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि उनके विरोधी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुईं।

अरब दलों की 19 सीटों ने उन्हें सरकार गठन के समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में ला दिया है।

यह इजरायल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब अरब प्रतिनिधियों की अनदेखी करके सरकार बनाने का रास्ता पहले से अधिक कठिन हो गया है।

क्या ट्रंप और नेतन्याहू के लिए बढ़ेगी चुनौती?

अमेरिका में ट्रंप और इजरायल में नेतन्याहू की राजनीति के सामने इन चुनाव परिणामों ने नई परिस्थितियां पैदा कर दी हैं।
अमेरिका में मुस्लिम और अरब मूल के मतदाताओं की राजनीतिक सक्रियता बढ़ रही है। वहीं इजरायल में अरब राजनीतिक दल संसद में अपनी संख्या के दम पर सरकार गठन के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि दोनों देशों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। अमेरिका में मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता और इजरायल में अरब दलों की सीटें किसी एक संयुक्त राजनीतिक आंदोलन का प्रमाण नहीं हैं, लेकिन दोनों घटनाएं लोकतांत्रिक राजनीति में इन समुदायों की बढ़ती भूमिका को जरूर दर्शाती हैं।

क्या अमेरिका का अगला राष्ट्रपति मुस्लिम हो सकता है?

अमेरिकी सीनेट में पहले मुस्लिम सांसद की ऐतिहासिक जीत के बाद अब एक सवाल अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन सकता है—क्या भविष्य में अमेरिका को मुस्लिम राष्ट्रपति भी मिल सकता है?
अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति बनने के लिए किसी विशेष धर्म की अनिवार्यता नहीं है। इसलिए कोई मुस्लिम अमेरिकी नागरिक भी राष्ट्रपति पद तक पहुंच सकता है।
हालांकि सीनेट में जीत को राष्ट्रपति पद की जीत का संकेत नहीं माना जा सकता। इसके लिए देशव्यापी जनसमर्थन, राजनीतिक संगठन और राष्ट्रपति चुनाव में सफलता जरूरी होगी।

मुस्लिम विरोधी संगठनों की चिंता और बदलती राजनीति

अमेरिका और यूरोप में मुस्लिम समुदाय को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस और ध्रुवीकरण देखने को मिलता रहा है। इजरायल में भी अरब नागरिकों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनके अधिकारों को लेकर विवाद जारी हैं।
अमेरिका में मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत और इजरायल में अरब दलों की ऐतिहासिक सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन समुदायों की राजनीतिक भागीदारी को अब नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

मुस्लिम विरोधी राजनीति करने वाले संगठनों और नेताओं के लिए भी ये परिणाम राजनीतिक और वैचारिक चुनौती पेश करते हैं।
अमेरिका की सीनेट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक आगाज और इजरायल की संसद में अरब दलों की 19 सीटें केवल चुनावी आंकड़े नहीं हैं। ये दुनिया की राजनीति में बदलते सामाजिक और लोकतांत्रिक समीकरणों की ओर इशारा करते हैं।

अब सवाल यह नहीं है कि मुस्लिम और अरब समुदाय राजनीति में अपनी जगह बना पाएंगे या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में वे दुनिया की बड़ी राजनीतिक शक्तियों के फैसलों को किस हद तक प्रभावित कर पाएंगे?


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KD Siddiqui, संपादक, यूनाइटेड इंडिया लाइव
प्रिंट से डिजिटल तक 25 वर्षों की पत्रकारिता। KD Siddiqui यूनाइटेड इंडिया लाइव के संपादक हैं और राजनीति व समाज से जुड़ी खबरों पर लिखते हैं।

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