ब्लैक होल स्पिन का पदार्थ से निकलने वाली रोशनी की झिलमिलाहट पर गहरा असर, नई खोज में खुलासा
अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से एक दिलचस्प खोज सामने आई है, जिसमें वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि ब्लैक होल के घूर्णन यानी स्पिन का सीधा असर उसके चारों ओर मौजूद पदार्थ से निकलने वाली रोशनी की झिलमिलाहट पर पड़ता है। खगोलविदों की एक टीम ने गहन अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि ब्लैक होल के इर्द-गिर्द बने घूर्णन डिस्क से उत्सर्जित प्रकाश में होने वाले उतार-चढ़ाव का पैटर्न, ब्लैक होल के घूमने की गति और दिशा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब कोई तारकीय पदार्थ किसी ब्लैक होल के अत्यंत प्रबल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में खिंचता है, तो वह एक चक्राकार डिस्क का निर्माण करता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एक्रीशन डिस्क कहा जाता है। यह पदार्थ अत्यधिक तेज गति से घूमते हुए भारी मात्रा में ऊर्जा और प्रकाश उत्सर्जित करता है। अध्ययन में पाया गया कि यदि ब्लैक होल तेज गति से घूम रहा हो, तो इस डिस्क से निकलने वाली रोशनी में झिलमिलाहट का स्वरूप अलग होता है, जबकि धीमी गति से घूमने वाले ब्लैक होल के मामले में यह पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज ब्रह्मांड में मौजूद विशालकाय ब्लैक होलों की आंतरिक संरचना और उनके व्यवहार को समझने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। अब तक खगोलविदों के लिए ब्लैक होल के स्पिन को सीधे मापना अत्यंत कठिन कार्य रहा है, क्योंकि ब्लैक होल से सीधे कोई भी सूचना या प्रकाश बाहर नहीं निकल पाता। ऐसे में उसके आसपास के पदार्थ से मिलने वाले संकेतों के विश्लेषण से यह जानकारी हासिल करना ही एकमात्र रास्ता बचता है।
शोध दल ने बताया कि आने वाले समय में अधिक उन्नत दूरबीनों और उपकरणों की मदद से इस झिलमिलाहट के पैटर्न का और बारीकी से अध्ययन किया जाएगा, ताकि ब्लैक होल के स्पिन, उसके द्रव्यमान और उसके आसपास की भौतिक परिस्थितियों के बीच संबंधों को और स्पष्ट रूप से समझा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की खोजें न केवल ब्लैक होल विज्ञान बल्कि संपूर्ण खगोल भौतिकी के क्षेत्र में नई दिशाएं खोल सकती हैं।
छवि: PIB
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