भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में बिकने वाली चाय में कीटनाशक अवशेषों की अधिकतम मात्रा को लेकर एक नया मसौदा जारी किया है। नियामक संस्था का कहना है कि यह सीमाएँ पूरी तरह वैज्ञानिक अध्ययन और जोखिम मूल्यांकन के आधार पर तय की गई हैं, ताकि आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चाय उपलब्ध हो सके।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, चाय की खेती में कीटों और फसल रोगों से बचाव के लिए किसान विभिन्न प्रकार के कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। समय के साथ इन रसायनों के अंश पत्तियों में रह जाते हैं, जो बाद में प्रसंस्करण के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं होते। इसी वजह से एक निश्चित वैज्ञानिक सीमा तय करना आवश्यक समझा गया, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
FSSAI का कहना है कि प्रस्तावित मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और परीक्षण विधियों के अनुरूप बनाए गए हैं। इस प्रक्रिया में घरेलू और वैश्विक अनुसंधान आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, साथ ही विशेषज्ञों की समितियों से भी सुझाव लिए गए हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह कदम उपभोक्ता सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की उसकी नीति का हिस्सा है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव अभी सार्वजनिक टिप्पणियों और हितधारकों की राय के लिए खुला रखा गया है। चाय उद्योग से जुड़े उत्पादक, निर्यातक संगठन और वैज्ञानिक संस्थान इस मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकते हैं। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के स्पष्ट और वैज्ञानिक मानकों से न केवल घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी भारतीय चाय की साख मजबूत होगी। कई देशों द्वारा पहले भी कीटनाशक अवशेषों को लेकर भारतीय चाय की खेपों पर आपत्ति जताई जाती रही है, ऐसे में यह नई व्यवस्था निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
FSSAI ने यह भी कहा कि वह नियमित रूप से बाजार से नमूने एकत्र कर जांच की प्रक्रिया जारी रखेगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तय की गई सीमाओं का पालन हो रहा है या नहीं। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में संबंधित उत्पादकों और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे गुणवत्तायुक्त और प्रमाणित ब्रांड की चाय का ही सेवन करें।
इस पहल को खाद्य सुरक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा बल्कि कृषि प्रथाओं में सुधार की दिशा में भी प्रेरित करेगा।
छवि: VOUS BALI (Pexels)
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