Critical Mineral Processing को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार लाई पूंजीगत व्यय सहायता योजना
नई दिल्ली। देश में महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के प्रसंस्करण क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक विशेष पूंजीगत व्यय सहायता योजना को मंजूरी दी है। खान मंत्रालय की इस पहल का मकसद घरेलू स्तर पर खनिज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।
सरकार द्वारा तैयार की गई इस योजना के तहत निजी कंपनियों और उद्यमियों को प्रसंस्करण संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट जैसे खनिज आज के दौर में इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा उपकरण, अर्धचालक और रक्षा उत्पादन सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। अभी तक भारत इन खनिजों के प्रसंस्करण के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों, खासकर China, पर निर्भर रहा है, जिसे यह योजना बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह सहायता योजना निवेशकों को प्रसंस्करण संयंत्र, मशीनरी और तकनीकी ढांचे की स्थापना में लगने वाली पूंजी का एक हिस्सा वापस दिलाने का काम करेगी। इससे कंपनियों के लिए नई इकाइयां लगाना आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनेगा और घरेलू उत्पादन क्षमता में इजाफा होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीक उद्योगों की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो गया है। इस योजना से देश की खनिज सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ निर्यात के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
सरकार ने उद्योग जगत से इस योजना का लाभ उठाने और अधिक से अधिक निवेश करने की अपील की है। आने वाले समय में इस पहल के तहत कई प्रस्तावों पर विचार किए जाने की उम्मीद है, जिससे देश के खनिज प्रसंस्करण क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल सकता है।
छवि: PIB
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