भारत और Russia की नौसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय समुद्री युद्धाभ्यास INDRA 2026 औपचारिक रूप से संपन्न हो गया। कई दिनों तक चले इस अभ्यास में दोनों देशों के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानों ने समुद्री सुरक्षा, आपसी तालमेल और संयुक्त युद्ध कौशल को निखारने के उद्देश्य से विभिन्न चरणों में भाग लिया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस बार के अभ्यास में हार्बर फेज और सी फेज दोनों शामिल रहे। हार्बर फेज के दौरान दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों ने रणनीतिक विचार-विमर्श, क्रॉस-डेक दौरे और पेशेवर संगोष्ठियों के माध्यम से अनुभव साझा किए। वहीं सी फेज में समुद्र में वास्तविक परिस्थितियों में सर्च एंड रेस्क्यू अभियान, एंटी-सबमरीन वारफेयर, वायु रक्षा अभ्यास और गन फायरिंग जैसी गतिविधियां संपन्न हुईं।
भारतीय Navy के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस अभ्यास को दोनों देशों के बीच वर्षों पुरानी रक्षा साझेदारी की निरंतरता बताते हुए कहा कि INDRA श्रृंखला भारत और Russia के सामरिक संबंधों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। यह अभ्यास वर्ष 2003 से शुरू हुई परंपरा का हिस्सा है, जिसमें बारी-बारी से दोनों देशों की नौसेनाएं मेजबानी करती रही हैं।
Russia की ओर से भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडल ने भी इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच यह सैन्य सहयोग न केवल द्विपक्षीय विश्वास को गहरा करता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होता है।
समापन समारोह में दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि आने वाले वर्षों में भी यह अभ्यास इसी तरह जारी रहेगा, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ऐसे संयुक्त अभ्यास भारत की सामरिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीय साझेदारियों को दर्शाते हैं।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस अभ्यास से प्राप्त अनुभवों का उपयोग भविष्य में होने वाले संयुक्त अभियानों की योजना बनाने में किया जाएगा, जिससे दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्री चुनौतियों का सामना करने के लिए और बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।
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