नई दिल्ली। चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद द्वारा स्थापित इस आध्यात्मिक संस्था की 75 वर्षों की यात्रा को भारतीय संस्कृति और वेदांत दर्शन के प्रचार-प्रसार में एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन ने न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और उपनिषदों की शिक्षाओं को आम जनमानस तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आधुनिक युग में वेदांत को सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत कर समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और योग, ध्यान तथा वेदांत की शिक्षाएं पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन जैसी संस्थाएं भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इस वैश्विक सम्मेलन में देश-विदेश से आए अनुयायियों, विद्वानों और आध्यात्मिक गुरुओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन चिन्मय मिशन की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है, जिसमें आने वाले दिनों में विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में मिशन से जुड़े सभी सदस्यों और अनुयायियों को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि यह संस्था आने वाले वर्षों में भी भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान जारी रखेगी।
छवि: Government of the Republic of India (Wikimedia Commons)
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