नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘सांख्यिकीय परिवर्तन, विश्लेषण एवं अनुसंधान’ नामक योजना को हरी झंडी दे दी है। इसे संक्षेप में VISTAAR नाम दिया गया है और यह वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक, यानी अगले पांच वर्षों के लिए संचालित की जाएगी।
यह योजना देश की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने और उसे अधिक सटीक, पारदर्शी एवं तकनीक आधारित स्वरूप देने के मकसद से तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि नीति निर्माण की बुनियाद मजबूत आंकड़ों पर टिकी होनी चाहिए, जिससे विकास योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सके। इसी सोच के तहत डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक और विश्वसनीय बनाने पर जोर दिया जाएगा।
कैबिनेट की इस मंजूरी के साथ ही सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के कार्यक्षेत्र को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। VISTAAR योजना के अंतर्गत सर्वेक्षण प्रणालियों में सुधार, डेटा विश्लेषण क्षमताओं का विकास और शोध कार्यों को प्रोत्साहन देने जैसे पहलुओं पर काम किया जाएगा। इससे केंद्र और राज्य सरकारों को नीतिगत निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह पहल विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जुड़ी हुई है, जिसके तहत देश को आने वाले वर्षों में आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होने से आर्थिक सर्वेक्षण, जनगणना संबंधी कार्य और विभिन्न क्षेत्रीय अध्ययनों को भी बल मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश की प्रगति को मापने और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए भरोसेमंद सांख्यिकीय आधार अत्यंत आवश्यक होता है। VISTAAR योजना के माध्यम से भारत अपनी सांख्यिकीय क्षमताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने का प्रयास कर रहा है, जिससे आने वाले दशकों में नीति-निर्माण प्रक्रिया अधिक डेटा-संचालित और परिणामोन्मुखी हो सकेगी।
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