Indo-Pacific Regional Dialogue 2026 में राजनाथ सिंह बोले- समुद्री सुरक्षा के लिए आपूर्ति शृंखला विविधीकरण जरूरी
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने ‘Indo-Pacific Regional Dialogue-2026’ के मंच से सामरिक सुरक्षा और समुद्री सहयोग को लेकर अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां और तनाव लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में समुद्री क्षेत्र में देशों के बीच आपसी निर्भरता को और सुदृढ़ करना बेहद आवश्यक हो गया है।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाना अब केवल एक आर्थिक रणनीति नहीं रह गई बल्कि यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बन चुका है। उन्होंने कहा कि किसी एक स्रोत या मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता किसी भी देश को संकट के समय कमजोर स्थिति में डाल सकती है, इसलिए वैकल्पिक और भरोसेमंद आपूर्ति मार्गों को विकसित करना समय की मांग है।
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि Indo-Pacific क्षेत्र के देशों को आपसी विश्वास और साझेदारी के आधार पर मिलकर काम करना होगा, ताकि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और व्यापारिक गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रह सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सहयोग केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर भी इसका विस्तार होना चाहिए।
रक्षा मंत्री के अनुसार, वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में जिस प्रकार असुरक्षा और अस्थिरता की स्थितियां उभर रही हैं, उनसे निपटने के लिए सभी साझेदार देशों को एकजुट होकर रणनीति बनानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा से एक मुक्त, खुले और समावेशी Indo-Pacific क्षेत्र का पक्षधर रहा है, जहां सभी देशों को समुद्री संसाधनों और मार्गों का समान रूप से उपयोग करने का अधिकार हो।
संवाद के दौरान रक्षा मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और सहयोग ही सबसे कारगर माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि तनाव की स्थिति में भी बातचीत का रास्ता खुला रखना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार के संघर्ष से बचा जा सके और क्षेत्र में शांति व समृद्धि कायम रह सके।
इस कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भी रक्षा मंत्री के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को एक साथ जोड़कर देखना होगा, तभी Indo-Pacific क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो पाएगी।
छवि: PIB
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