केंद्रीय राज्य मंत्री Dr. Jitendra Singh जल्द ही देशभर में चलने वाले डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान के पांचवें संस्करण की औपचारिक शुरुआत करने जा रहे हैं। यह पहल खासतौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें हर साल जीवित प्रमाणपत्र जमा करने के लिए बैंक या सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा संचालित इस राष्ट्रव्यापी मुहिम का मकसद टेक्नोलॉजी के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सरल बनाना है। पिछले चार चरणों में इस योजना को देशभर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी, जिसके बाद अब सरकार ने इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है।
अभियान के तहत चेहरा-पहचान तकनीक (फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल करते हुए पेंशनभोगी अपने घर बैठे, मोबाइल फोन के माध्यम से ही जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकेंगे। इससे न केवल बुजुर्ग और दिव्यांग पेंशनभोगियों को राहत मिलेगी, बल्कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लाभार्थियों के लिए भी यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बार अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के विभिन्न शहरों में विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे, जहां तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहकर पेंशनभोगियों की मदद करेंगे। डाक विभाग, बैंकों और सामान्य सेवा केंद्रों के साथ मिलकर यह अभियान संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
उद्घाटन समारोह में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और पेंशन संबंधी कार्यों से जुड़े प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान अभियान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी और पिछले अनुभवों के आधार पर इसमें किए गए सुधारों को भी रेखांकित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि डिजिटल माध्यम अपनाने से न सिर्फ समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
उल्लेखनीय है कि देश में लाखों की संख्या में केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया मिशन के तहत यह कदम प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
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