राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की सक्रिय पहल के बाद Hyderabad स्थित Central Jail प्रशासन ने विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति रखने वाले बंदियों के लिए एक अलग, लिंग-तटस्थ प्रकोष्ठ तैयार करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह निर्णय उन कैदियों के अधिकारों और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है, जिनकी लैंगिक पहचान पारंपरिक पुरुष-महिला वर्गीकरण में फिट नहीं बैठती।
आयोग को यह जानकारी मिली थी कि जेल में ऐसे व्यक्तियों को अक्सर सामान्य बैरकों में रखा जाता था, जिससे उन्हें असुरक्षा, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए NHRC ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा था। आयोग का मानना था कि किसी भी बंदी के साथ उसकी लैंगिक पहचान के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करना मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग के निर्देशों के अनुपालन में जेल प्रशासन ने अब एक समर्पित लिंग-तटस्थ स्थान विकसित किया है, जहां ऐसे बंदियों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। इस प्रकोष्ठ के निर्माण से संबंधित व्यक्तियों को न केवल शारीरिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि मानसिक रूप से भी वे अधिक सहज महसूस कर सकेंगे।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे देश की अन्य जेलों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि कारागार सुधार की दिशा में यह एक सकारात्मक और संवेदनशील प्रयास है, जो ट्रांसजेंडर और अन्य विविध लैंगिक पहचान वाले व्यक्तियों के प्रति समाज की सोच बदलने में भी मददगार साबित हो सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकोष्ठ के संचालन के लिए जेल कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे ऐसे बंदियों के साथ संवेदनशीलता और सम्मानपूर्वक व्यवहार कर सकें। NHRC ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की निगरानी आगे भी जारी रखेगा ताकि व्यवहार में वास्तविक बदलाव सुनिश्चित हो सके।
यह पहल देशभर में बंदी अधिकारों और लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बहस को भी जन्म दे सकती है, विशेषकर उन संस्थानों में जहां हाशिए पर रहने वाले समुदायों के साथ संवेदनशील व्यवहार की आवश्यकता होती है।
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