चुनाव आयोग के अफसरों पर FIR की मांग: कोर्ट ने पुलिस से मांगी नई रिपोर्ट, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान
पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा, शिकायतकर्ता से पूछताछ और प्रारंभिक जांच के बिना दाखिल नहीं हो सकती थी पहली रिपोर्ट। अगली सुनवाई 11 नवंबर को।
नई दिल्ली। अधिवक्ता महमूद प्राचा की उस शिकायत पर, जिसमें चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है, दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को नई कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का निर्देश दिया है। पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कौतुक भारद्वाज ने संसद मार्ग थाने के जांच अधिकारी से कहा है कि वे शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करें, उनके पेश किए दस्तावेजों पर विचार करें और उसके बाद नई रिपोर्ट अदालत में रखें।
शिकायत 2025 में दायर की गई थी। इसमें आरोप है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के प्रावधानों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की हैंडबुक 2023 का उल्लंघन हुआ। शिकायत के मुताबिक दिल्ली समेत कई राज्यों में आयोग के अधिकारियों ने फर्जी मतदान में मदद की और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गैरकानूनी तरीके से हटाए गए। इसमें सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का भी आरोप है। एफआईआर की मांग मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, बूथ लेवल अधिकारियों और आयोग के अन्य अफसरों के खिलाफ की गई है।
मामला बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत दिए गए आवेदन पर बहस के लिए सूचीबद्ध था। प्राचा ने पुलिस की पहली रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल कर बताया कि उसमें कमियां हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि जांच अधिकारी ने उन्हें अपने सबूत रखने का मौका नहीं दिया। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच या शिकायतकर्ता से पूछताछ के बिना यह रिपोर्ट दाखिल नहीं की जा सकती थी। मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
आदेश के बाद प्राचा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही तय कराने की उनकी लड़ाई कानून के दायरे में और बिना डरे जारी रहेगी।
दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई प्रेस वार्ता में प्राचा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने ही बनाए नियमों का उल्लंघन कर रहा है और इसका फायदा सत्ताधारी दल को मिल रहा है। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने का दावा किया। प्राचा ने कहा कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा है और वे संविधान की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे। उन्होंने जनता, राजनीतिक दलों और सिविल सोसायटी से 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पहुंचकर चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। चुनाव आयोग का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है, उसका बयान आने पर खबर अपडेट की जाएगी।
प्राचा इससे पहले भी चुनाव आयोग के खिलाफ अदालतों का दरवाजा खटखटा चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में ईवीएम से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच की मांग वाली उनकी जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी। दिसंबर 2020 में दिल्ली दंगों के मामलों में पैरवी के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके दफ्तर पर छापेमारी की थी, जिसकी वकीलों के संगठनों ने निंदा की थी।
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