Andaman and Nicobar Command में आयोजित हुए BIMSTEC देशों के पहले संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को और मज़बूत बनाना तथा सदस्य देशों के बीच आपसी समन्वय को बढ़ाना था।
भारत की अगुवाई में आयोजित इस अभ्यास में बंगाल की खाड़ी से जुड़े BIMSTEC समूह के कई देशों की नौसेनाओं और तटरक्षक बलों ने हिस्सा लिया। कई दिनों तक चले इस विशेष अभ्यास में समुद्री डकैती रोकने, तस्करी पर नकेल कसने, खोज एवं बचाव अभियान चलाने तथा आपात स्थितियों में संयुक्त प्रतिक्रिया देने जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास के दौरान प्रतिभागी देशों के युद्धपोतों और समुद्री गश्ती दलों ने संयुक्त गश्त, सूचना साझाकरण तंत्र और आपसी संचार व्यवस्था को परखा। इसके अलावा मानव तस्करी, अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों और समुद्री आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक चर्चाएं भी हुईं।
Andaman and Nicobar Command, जो भारत की एकमात्र त्रि-सेवा कमान है, को इस अभ्यास की मेज़बानी के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह क्षेत्र हिंद महासागर और मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के रूप में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां से अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों पर निगरानी रखना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना आसान होता है।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहले संस्करण की सफलता के बाद भविष्य में इस तरह के अभ्यासों को नियमित रूप से आयोजित करने की योजना है, जिससे BIMSTEC सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और गहरा किया जा सके। यह पहल क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को सशक्त बनाने तथा साझा समुद्री संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त अभ्यासों से न केवल सैन्य तालमेल बढ़ता है, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच कूटनीतिक विश्वास भी मज़बूत होता है, जो दीर्घकाल में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।
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