राजस्थान के Udaipur जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी विद्यालय की बदहाल इमारत में पढ़ाई के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कक्षा में अचानक छत का प्लास्टर भरभराकर नीचे गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से तीन मासूम छात्र घायल हो गए। इस घटना ने सरकारी स्कूलों के रखरखाव और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए National Human Rights Commission (NHRC) ने तुरंत स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने इसे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब करने का फैसला लिया है। जानकारी के अनुसार, स्कूल की इमारत लंबे समय से जर्जर हालत में थी और इसकी मरम्मत को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही थी, बावजूद इसके समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
घटना के वक्त कक्षा में कई विद्यार्थी मौजूद थे, जो अचानक हुई इस घटना से सहम गए। प्लास्टर गिरने से घायल हुए तीनों छात्रों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत को खतरे से बाहर बताया जा रहा है। हालांकि यह घटना एक बार फिर सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल इमारतों की पोल खोलती नजर आ रही है, जहां बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करवाई जा रही है।
NHRC ने इस प्रकरण में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें यह बताना होगा कि स्कूल भवन की मरम्मत के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर रोष जताते हुए प्रशासन से मांग की है कि जर्जर सरकारी भवनों का सर्वेक्षण कर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया जाए, ताकि आगे किसी भी बच्चे को इस तरह की दुर्घटना का शिकार न होना पड़े। यह मामला एक बार फिर देश में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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