राजधानी Delhi में आयोजित विजय दशमी के भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए इस पर्व के ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि यह सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है, जो हर युग में समाज को सही राह दिखाता रहा है।
PM मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत उपस्थित जनसमूह का अभिनंदन करते हुए की। उन्होंने कहा कि रावण दहन की परंपरा केवल एक पुतला जलाने की रस्म नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर छिपी बुराइयों—अहंकार, लालच और अन्याय—को त्यागने की प्रेरणा देती है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में जब देश विकास के नए आयाम छू रहा है, तब हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूती से थामे रखना होगा।
अपने भाषण के मूल पाठ में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन हमें धैर्य, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाता है, जिसे हर नागरिक को अपने दैनिक जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसमें हर नागरिक की भागीदारी अनिवार्य है।
कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हजारों की संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को बड़े उत्साह के साथ सुना। इस अवसर पर पारंपरिक रामलीला मंचन के साथ-साथ रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन भी किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में परिवार और बच्चे पहुंचे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में सभी देशवासियों को विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता लेकर आए। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि समाज को जोड़ने वाली इन परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक सहेज कर रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।
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