परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम भारत में पूरी तरह शांति के लक्ष्यों पर केंद्रित, AI युग को मिलेगी नई ऊर्जा
नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि देश का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए संचालित किया जा रहा है और इसका कोई सैन्य इरादा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि परमाणु ऊर्जा का उपयोग देश की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने, स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने और आने वाले समय में तेजी से बढ़ती तकनीकी जरूरतों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रणालियों को ऊर्जा देने के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में डेटा सेंटरों और AI तकनीकों के विस्तार के साथ बिजली की खपत में भारी इजाफा होगा। ऐसे में परमाणु ऊर्जा को एक भरोसेमंद, निरंतर और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने में मदद करेगा। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में परमाणु रिएक्टरों की क्षमता बढ़ाकर इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जाए।
संबंधित अधिकारियों ने यह भी दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों और परमाणु अप्रसार से जुड़ी वैश्विक नीतियों का पूरी तरह पालन करता रहा है। देश की परमाणु नीति शुरू से ही रक्षा के बजाय ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग पर केंद्रित रही है। उनका कहना है कि यही पारदर्शी दृष्टिकोण भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI क्रांति के इस दौर में ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है। इस दिशा में परमाणु ऊर्जा को भविष्य की रीढ़ बताया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण अनुकूल होगी बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूत करेगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में इस दिशा में नई नीतिगत घोषणाएं भी की जा सकती हैं, जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ावा मिलेगा।
छवि: PIB
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